दिल्ली पुलिस पर पत्रकार की पिटाई का आरोप सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। पत्रकार शाहीन खान ने एक वीडियो जारी कर दावा किया है कि दिल्ली में रिपोर्टिंग के दौरान पुलिस ने उन्हें और उनकी सहयोगी पत्रकार को रोककर थाने ले गई और वहां उनके साथ मारपीट व बदसलूकी की गई। शाहीन खान के मुताबिक, वह एक कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के लिए पहुंची थीं।
पत्रकार ने अपने वीडियो में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें पत्रकारिता करने से रोका गया और बाद में पुलिस स्टेशन ले जाकर उनके साथ कथित तौर पर शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया।
पत्रकार शाहीन खान ने क्या आरोप लगाए?
शाहीन खान का कहना है कि वह 4PM के लिए रिपोर्टिंग कर रही थीं। इसी दौरान वह दिल्ली की मुख्यमंत्री से कुछ सवाल पूछना चाहती थीं। उनका दावा है कि पुलिस ने उन्हें सवाल पूछने और रिपोर्टिंग करने से रोक दिया।
रिपोर्टिंग के दौरान पुलिस ने रोका
पत्रकार के मुताबिक, वह मोबाइल पत्रकारिता के जरिए कार्यक्रम को कवर कर रही थीं। उनका कहना है कि उन्होंने किसी को परेशान नहीं किया और केवल सरकार से कुछ सवाल पूछने की कोशिश की।
इसी दौरान पुलिस अधिकारियों ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की।
पुलिस स्टेशन ले जाने का दावा
शाहीन खान के अनुसार, पुलिस उन्हें और उनकी सहयोगी पत्रकार को पुलिस स्टेशन ले गई। वहां उनसे उनका फोन देने के लिए कहा गया।
पत्रकार का दावा है कि उन्होंने पुलिस से पूछा कि आखिर उन्होंने कौन सा अपराध किया है और उनका फोन क्यों लिया जा रहा है।
फोन को लेकर भी हुआ विवाद
शाहीन खान ने वीडियो में आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपने परिवार को घटना की जानकारी देने के लिए फोन करने की कोशिश की तो उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।
उनका कहना है कि पुलिस ने उनका मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया।
पत्रकार ने लगाए गंभीर आरोप
शाहीन खान ने अपने वीडियो में दावा किया कि पुलिस स्टेशन के अंदर उनके साथ थप्पड़ और मारपीट की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ मौजूद महिला पत्रकार के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।
उन्होंने घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पत्रकारों को सवाल पूछने और अपना काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए।
मुस्लिम होने को लेकर भी शाहीन खान ने उठाए सवाल
शाहीन खान ने अपने वीडियो में अपने नाम और मुस्लिम पहचान का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम होना किसी पत्रकार के लिए अपराध है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके नाम में ‘खान’ और ‘मुहम्मद’ होने को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
वीडियो में पुलिस कार्रवाई का दावा
शाहीन खान ने पुलिस स्टेशन से वीडियो बनाकर पूरी घटना बताई और दावा किया कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट अपराध के थाने लाया गया।
उनका कहना है कि यदि उन्होंने कोई कानून तोड़ा था तो पुलिस को उन्हें उस अपराध की जानकारी देनी चाहिए थी।
पत्रकारों की ओर से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद शाहीन खान के समर्थन में आवाजें उठने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों से कथित मारपीट में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग की जा रही है।
मामले में निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर पत्रकारिता से जुड़े लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। सवाल यह है कि आखिर रिपोर्टिंग कर रही पत्रकार को पुलिस स्टेशन क्यों ले जाया गया और वहां उनके साथ वास्तव में क्या हुआ।
पुलिस का पक्ष भी महत्वपूर्ण
इस मामले में पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम वास्तव में किस तरह हुआ और पुलिस की कार्रवाई किस आधार पर की गई।
कांग्रेस ने भी उठाया मामला
रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर सवाल उठाए और पत्रकार के साथ कथित मारपीट की आलोचना की।
कांग्रेस की ओर से मामले में कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है।
पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में पत्रकारों को सवाल पूछने और रिपोर्टिंग करने की कितनी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
पत्रकारों का काम सवाल पूछना और जनता तक जानकारी पहुंचाना है। वहीं, पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
अब आगे क्या होगा?
शाहीन खान ने अपने वीडियो के जरिए पूरे मामले की जांच और कथित तौर पर मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल इस मामले में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के नतीजे का इंतजार है। आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
नोट: इस खबर में बताए गए मारपीट और भेदभाव से जुड़े आरोप पत्रकार शाहीन खान के वीडियो और उनके दावों पर आधारित हैं। स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुलिस बयान के बिना आरोपों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
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