अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कतर और ईरान के बीच ईरानी पायलटों को लेकर नया विवाद सामने आया है। ईरान ने पायलटों के बारे में जानकारी और जांच की मांग की है, जबकि कतर ने हिरासत के दावे को खारिज किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी क्षेत्र, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और अमेरिका-ईरान तनाव पर भी दुनिया की नजर बनी हुई है। जानिए आखिर कई महीने पुराने इस मामले को अब क्यों उठाया गया और इसके पीछे क्या वजह हो सकती है।
लेकिन कतर ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। कतर का कहना है कि उसकी हिरासत में कोई ईरानी पायलट नहीं है और इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया तथा कुछ माध्यमों में भ्रामक दावे किए जा रहे हैं।
आखिर पूरा मामला क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद कई महीने पहले हुई एक घटना से जुड़ा है। कतर का कहना है कि ईरानी सैन्य विमान उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए थे। कतर की ओर से उन विमानों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद कतर ने अपनी हवाई सीमा की सुरक्षा के लिए कार्रवाई की। घटना के बाद कतर की खोज और बचाव टीमों ने इलाके में अभियान चलाया और एक पायलट के अवशेष बरामद किए।
कतर का दावा है कि उसने ईरानी पक्ष से संपर्क करके इन अवशेषों को वापस सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की थी। साथ ही, कतर ने ईरान को खोज और बचाव अभियान से जुड़ी जानकारी देखने के लिए एक टीम भेजने का निमंत्रण भी दिया था। कतर के अनुसार, ईरान की ओर से इस निमंत्रण पर अब तक सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
ईरान का क्या कहना है?
ईरान इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देख रहा है। ईरानी सैन्य अधिकारी मोहम्मद बाकेरज़ादेह ने कहा है कि तेहरान अपने पायलटों के भाग्य की जानकारी चाहता है और कतर में एक तथ्य-जांच टीम भेजने की मांग कर चुका है।
ईरान का आरोप है कि उसके पायलटों के मामले की जांच में देरी की जा रही है। ईरान ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है।
यानी एक तरफ ईरान कह रहा है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और उसके पायलटों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए, जबकि दूसरी तरफ कतर साफ कह रहा है कि उसकी हिरासत में कोई ईरानी पायलट नहीं है।
सवाल यह है कि मामला अब इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह घटना कई महीने पुरानी है, तो ईरान ने इसे अब दोबारा इतने जोरदार तरीके से क्यों उठाया?
क्या तेहरान केवल अपने पायलटों की स्थिति स्पष्ट करवाना चाहता है?
या फिर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे बड़े टकराव के बीच खाड़ी देशों के साथ ईरान के रिश्तों में भी नई दरार दिखाई देने लगी है?
इन सवालों का जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है। हालांकि इतना जरूर है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव पहले से काफी ज्यादा है।
कतर क्यों महत्वपूर्ण है?
कतर मध्य पूर्व की राजनीति में एक महत्वपूर्ण देश है। वह एक ओर अमेरिका का करीबी साझेदार है और दूसरी ओर ईरान के साथ भी उसके राजनयिक संबंध बने हुए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कतर लंबे समय से क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा बातचीत के रास्ते तलाशने में भी खाड़ी के मध्यस्थ देशों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
ऐसे समय में ईरान और कतर के बीच पायलटों को लेकर पैदा हुआ विवाद निश्चित रूप से पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
सिर्फ कतर ही नहीं, दूसरे खाड़ी देश भी दबाव में
ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव का यह अकेला मामला नहीं है। हालिया घटनाक्रम में कुवैत को लेकर भी ईरान और कुवैत के बीच विवाद सामने आया है।
Reuters के अनुसार, ईरान ने कुवैत में हिरासत में लिए गए चार ईरानी नागरिकों के बारे में भी जानकारी मांगी है। ईरान का कहना है कि ये लोग नौवहन संबंधी समस्या के कारण गलती से कुवैती क्षेत्र में चले गए थे, जबकि कुवैत की ओर से उन पर संदिग्ध गतिविधियों की आशंका जताई गई थी।
इससे साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर अब केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है। इसके बीच खाड़ी के दूसरे देशों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य भी बना बड़ा मुद्दा
इसी बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर भी ईरान और ओमान के बीच बातचीत महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी बड़े तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र में ईरान, अमेरिका और अरब देशों के बीच बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मामला नहीं है। इसका प्रभाव दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल कतर ने ईरानी पायलटों को हिरासत में रखने के आरोप को स्पष्ट रूप से नकार दिया है, जबकि ईरान अपने पायलटों के मामले में जांच और जानकारी की मांग कर रहा है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या कतर और ईरान इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझा पाएंगे या फिर यह विवाद दोनों देशों के रिश्तों में एक नया तनाव पैदा करेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मामले में अभी दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और विश्वसनीय स्रोतों से सामने आने वाली जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
आपको क्या लगता है—ईरान और कतर के बीच यह विवाद केवल पुराने सैन्य घटनाक्रम की जांच से जुड़ा है या इसके पीछे खाड़ी क्षेत्र की बदलती राजनीति भी एक बड़ी वजह हो सकती है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। यह भी पढ़ें









