देश और विदेश से मुस्लिम समुदाय से जुड़ी कई अहम खबरें सामने आई हैं। मलेशिया में मुसलमानों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो और हिंसा के लिए उकसाने वाले नेपाली नागरिक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं उत्तराखंड में एक मदरसे को कथित तौर पर जरूरी मंजूरी नहीं होने के कारण सील कर दिया गया। इसके अलावा त्रिपुरा में गाय चोरी के शक में एक मुस्लिम व्यक्ति की कथित मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया है।
मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक वीडियो का मामला
मलेशिया में रहने वाले नेपाली नागरिक भोगन कुमार पर नेपाल और भारत के मुसलमानों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगा है।
बताया गया है कि भोगन कुमार मलेशिया में एक इमारत के बाहर चपरासी के तौर पर काम करता था। आरोप है कि वह लगातार सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो पोस्ट कर रहा था, जिनमें मुसलमानों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और हिंसा के लिए उकसाने वाली बातें कही गईं।
पुलिस से की गई थी शिकायत
मामले को लेकर रॉयल मलेशिया पुलिस (PDRM) से शिकायत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मलेशिया में रहते हुए भोगन कुमार कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाली सामग्री प्रसारित कर रहा है।
इसके बाद मलेशियाई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
क्या हैं आरोप?
पुलिस कार्रवाई के बाद उस पर नेपाल और भारत के मुसलमानों के खिलाफ कथित रूप से नफरत फैलाने तथा हिंसा के लिए उकसाने से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी संबंधित अधिकारियों की जांच पर निर्भर करेगी।
उत्तराखंड में मदरसा सील किए जाने से विवाद
उत्तराखंड के बाजपुर क्षेत्र में जामिया हनफिया रजा उलूम मदरसे को प्रशासन ने कथित तौर पर जरूरी मंजूरी नहीं होने के आधार पर सील कर दिया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन की कार्रवाई के बाद मदरसे के प्रबंधन और मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
मदरसा प्रबंधन ने क्या कहा?
मदरसे के प्रबंधक मौलाना इरशाद अली का कहना है कि मदरसे की मंजूरी के लिए पहले ही आवेदन किया जा चुका था और निर्धारित फीस भी जमा की गई थी।
उनके मुताबिक, आवेदन और फीस जमा करने से संबंधित रसीदें भी अधिकारियों को दिखाई गई थीं।
30 सितंबर तक का समय मिलने का दावा
मौलाना इरशाद अली का दावा है कि मदरसों को मंजूरी से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया था। इसके बावजूद जामिया हनफिया रजा उलूम को सील कर दिया गया।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस दावे से अलग बात कही गई है।
प्रशासन का क्या कहना है?
प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान मदरसा प्रबंधन की ओर से आवश्यक मंजूरी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसी आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
मदरसा सील होने के बाद मुस्लिम संगठनों और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका सवाल है कि यदि मंजूरी की प्रक्रिया पहले से चल रही थी, तो मदरसे को तत्काल सील करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
असीम वकार से पुरानी पार्टी की गाड़ी लौटाने की मांग
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी एक नया विवाद चर्चा में है। हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए नेता सैयद असीम वकार को लेकर उनकी पुरानी पार्टी की ओर से गाड़ी वापस करने की मांग की गई है।
उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शौकत अली ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए असीम वकार से पार्टी की ओर से दी गई स्कॉर्पियो वापस करने को कहा।
फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा?
शौकत अली ने अपनी पोस्ट में तंज करते हुए कहा कि किसी पार्टी से इस्तीफा देकर जाने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी की चीजें भी साथ ले जाई जाएं।
उन्होंने असीम वकार से वह स्कॉर्पियो वापस करने की मांग की, जो उनके मुताबिक उन्होंने पार्टी की ओर से उन्हें दी थी।
इस पोस्ट के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस विवाद की चर्चा तेज हो गई है।
त्रिपुरा में मुस्लिम व्यक्ति की कथित मॉब लिंचिंग
त्रिपुरा से एक और गंभीर मामला सामने आया है। यहां जलील रहमान नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति की कथित तौर पर भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।
बताया जा रहा है कि जलील रहमान पर गाय चोरी का शक जताया गया था। हालांकि उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने एक किसान से दो गायें खरीदी थीं और बुधवार सुबह उन्हें लेने के लिए गए थे।
गाय चोरी के शक में हुई मारपीट
रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह करीब 4 बजे कुछ लोगों ने जलील रहमान को दो गायों के साथ देखा। इसके बाद उन पर गाय चोरी करने का शक जताते हुए कथित तौर पर मारपीट शुरू कर दी गई।
घायल अवस्था में जलील रहमान ने फोन के जरिए अपने परिवार को घटना की जानकारी दी।
परिवार को भी बनाया गया निशाना
परिजनों के अनुसार, जब वे जलील रहमान को लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे तो उनके साथ भी कथित तौर पर मारपीट की गई।
बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और घायल जलील रहमान को अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और घायल जलील रहमान को अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इन घटनाओं ने खड़े किए कई सवाल
मुसलमानों के खिलाफ कथित नफरत फैलाने वाले कंटेंट पर मलेशिया में पुलिस कार्रवाई, उत्तराखंड में मदरसा सील किए जाने और त्रिपुरा में कथित मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने अलग-अलग स्तर पर सवाल खड़े किए हैं।
मदरसे के मामले में जहां प्रबंधन प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं त्रिपुरा की घटना में परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होगी। इसी तरह मलेशिया में भोगन कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति कानूनी जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
नोट -इन सभी मामलों में संबंधित पक्षों के दावों और प्रशासनिक कार्रवाई को अलग-अलग समझना जरूरी है। जहां आरोप गंभीर हैं, वहीं किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
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