मदीना मुनव्वरा: आज की बड़ी खबर नबी करीम ﷺ के प्यारे शहर मदीना मुनव्वरा से ऐतिहासिक खबर सामने आई है जिसने दुनिया भर के मुसलमानों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सऊदी अरब के हेरिटेज कमीशन ने घोषणा की है कि मदीना के अल-महद क्षेत्र में पुरातात्विक सर्वेक्षण और शोध के दौरान एक दुर्लभ पत्थर मिला है, जिस पर इस्लाम के दूसरे खलीफा हज़रत उमर इब्न अल-खत्ताब (रज़ि.) का नाम अंकित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक साधारण पत्थर की खोज नहीं है, बल्कि शुरुआती इस्लामी इतिहास का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है, जो इस्लाम के प्रारंभिक दौर की याद ताज़ा करता है। इसी कारण इस खोज को बेहद अहम माना जा रहा है।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, अल-महद गवर्नरेट में एक व्यापक पुरातात्विक सर्वेक्षण चलाया जा रहा था। इसका उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद ऐतिहासिक स्थलों, प्राचीन बस्तियों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी जानकारियों को एकत्र करना और उन्हें सुरक्षित रखना था। इसी दौरान विशेषज्ञों को एक चट्टान पर ऐसा शिलालेख मिला, जिसमें हज़रत उमर (रज़ि.) का नाम दर्ज है।
दिलचस्प बात यह है कि यह शिलालेख उन 1,774 ऐतिहासिक खोजों में शामिल है, जो सर्वेक्षण के पहले और दूसरे चरण के दौरान सामने आई हैं। यानी विशेषज्ञों को केवल यही एक पत्थर नहीं मिला, बल्कि बड़ी संख्या में प्राचीन अवशेष और ऐतिहासिक प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं।
हेरिटेज कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण के दौरान 173 ऐसे पुरातात्विक स्थल भी मिले हैं, जिनका पहले कोई सरकारी रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संकेत मिलता है कि अल-महद और उसके आसपास का इलाका प्राचीन काल में मानव बस्तियों, व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।
शोध के दौरान 173 चट्टानी शिलालेख भी मिले हैं। इसके अलावा प्राचीन अरबी कविता से जुड़ी कई लिखित सामग्री और विभिन्न भाषाओं में लिखे अनेक अभिलेख भी सामने आए हैं, जो इस क्षेत्र के समृद्ध इतिहास को दर्शाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, खोजी गई वस्तुओं में 1,259 चट्टानों पर बने प्राचीन चित्र और नक्काशियां शामिल हैं। इसके साथ ही 461 इस्लामी अभिलेख मिले हैं, जिनसे इस्लामी काल के इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है।
विशेषज्ञों को थमूदी भाषा में लिखे गए 34 शिलालेख भी मिले हैं। थमूदी भाषा अरब के प्राचीन कबीलों की भाषाओं में गिनी जाती है। इसलिए ये खोजें अरब के प्राचीन इतिहास को समझने में भी महत्वपूर्ण साबित होंगी।
इसके अलावा 11 पत्थर की संरचनाएं, तीन प्राचीन महलों के अवशेष, दो प्राचीन मील के पत्थर (संग-ए-मील) और चार ऐतिहासिक कुएं भी मिले हैं। इनसे उस समय की जीवनशैली, यात्रा मार्ग और सामाजिक व्यवस्था के बारे में अहम जानकारियां मिल सकती हैं।
पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के पत्थरों पर लिखे शिलालेख बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से यह पता चलता है कि प्राचीन समय में यहां कौन लोग रहते थे, उनका जीवन कैसा था, उनके धार्मिक और सामाजिक हालात क्या थे और उनकी सभ्यता किस प्रकार की थी। विशेष रूप से शुरुआती इस्लामी दौर से जुड़े लिखित प्रमाण इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत मूल्यवान माने जाते हैं।
बताया गया है कि इस पत्थर पर लिखी गई इबारत बिना नुक्तों और बिना ज़ेर-ज़बर (अरबी हरकतों) के लिखी गई है, जो उस दौर की लेखन शैली को दर्शाती है।
हज़रत उमर इब्न अल-खत्ताब (रज़ि.)
हज़रत उमर इब्न अल-खत्ताब (रज़ि.) इस्लाम के दूसरे खलीफा थे। उन्होंने 634 ईस्वी से 644 ईस्वी तक इस्लामी राज्य का नेतृत्व किया। वे पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ के करीबी सहाबा में शामिल थे और इस्लामी इतिहास में न्यायप्रिय शासन, उत्कृष्ट प्रशासन और महान सुधारों के लिए उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता है।
उनके शासनकाल में इस्लामी राज्य का तेज़ी से विस्तार हुआ, कई नए क्षेत्र इसमें शामिल हुए और एक मजबूत प्रशासनिक तथा न्यायिक व्यवस्था स्थापित की गई, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है।
सऊदी अधिकारियों का कहना है कि अल-महद क्षेत्र में पुरातात्विक शोध और सर्वेक्षण का कार्य आगे भी जारी रहेगा, ताकि और अधिक ऐतिहासिक प्रमाण दुनिया के सामने लाए जा सकें। उनका कहना है कि सऊदी अरब की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हज़रत उमर (रज़ि.) के नाम वाला यह दुर्लभ पत्थर और अन्य हालिया खोजें न केवल सऊदी अरब बल्कि पूरी इस्लामी दुनिया के इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
मदीना मुनव्वरा की पवित्र धरती आज भी अपने भीतर इतिहास के अनगिनत रहस्य समेटे हुए है और समय-समय पर सामने आने वाली ऐसी खोजें हमें इस्लाम के गौरवशाली अतीत की याद दिलाती रहती हैं।यह भी पढ़ें



