ब्रेकिंग न्यूज नौकरी मोबाइल घड़ी लैपटॉप तकनीक व्यापार खेल कार बाइक राजनीति इतिहास एवं विरासत वक्फ़ बोर्ड जमीयत उलेमा मुस्लिम पर्सनल लॉ योजना फैक्ट चेक

--विज्ञापन यहां--

असदुद्दीन ओवैसी का 1 बड़ा बयान: आजादी की लड़ाई में उलेमा की कुर्बानियों को नहीं भूल सकते

On: August 15, 2026 3:32 PM
हमें फॉलो करें:
असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान
--विज्ञापन यहां--

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की आजादी की लड़ाई, उलेमा की कुर्बानियों, संविधान और मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई केवल 1920 से शुरू नहीं हुई थी, बल्कि अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का इतिहास इससे काफी पुराना है।

ओवैसी ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत टीपू सुल्तान की शहादत से लेकर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला की कुर्बानी तक के इतिहास में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि देश के उलेमा ने भी अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने केवल फतवे जारी नहीं किए, बल्कि अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत अपनी जान देकर भी चुकाई।

मौलाना महमूद हसन और माल्टा की जेल का जिक्र

उन्होंने कहा कि आज अगर हम आजादी के साथ सांस ले रहे हैं तो इसमें उन स्वतंत्रता सेनानियों और उलेमा की मेहनत और कुर्बानियों का बड़ा योगदान है, जिन्होंने अपने घर-परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को छोड़कर देश के लिए संघर्ष किया।

हम अपने बुजुर्गों की कुर्बानियों को नहीं भूल सकते

ओवैसी ने कहा कि अगर आजादी के लिए संघर्ष करने वाले इन लोगों की कुर्बानियों को भुला दिया गया तो यह इतिहास के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि हम अपने बुजुर्गों की कुर्बानियों को नहीं भूल सकते।

उन्होंने मौलाना हुसैन अहमद मदनी का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भारत के साझा और समावेशी समाज की बात की थी। ओवैसी ने सवाल उठाया कि आज देश में अगर किसी को शक के आधार पर निशाना बनाया जाए, घरों को तोड़ा जाए या बच्चों के साथ हिंसा हो तो क्या यही वह भारत है जिसका सपना स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था?

सिर्फ आंसू बहाने से काम नहीं चलेगा

AIMIM प्रमुख ने कहा कि केवल दुख व्यक्त करने या आंसू बहाकर घर लौट जाने से हालात नहीं बदलेंगे। उन्होंने लोगों से राजनीतिक रूप से मजबूत होने और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की।

ओवैसी ने कहा कि आजादी के 75 साल से अधिक समय में देश ने कई राजनीतिक प्रयोग देखे हैं, लेकिन इसके बावजूद समाज में सांप्रदायिकता और विभाजन की राजनीति बढ़ती गई।

उन्होंने कहा कि हमने दिलों को जोड़ने की बात की, लेकिन कई बार ऐसी राजनीति हुई जिसने लोगों के बीच दूरियां बढ़ाईं। उन्होंने कमजोर, दलित, आदिवासी, गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को राजनीतिक रूप से मजबूत किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

कमजोरों को न्याय तभी मिलेगा जब राजनीतिक ताकत होगी

ओवैसी ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान ने देश के नागरिकों को बराबरी और अधिकार दिए हैं, लेकिन इन अधिकारों को हासिल करने के लिए राजनीतिक भागीदारी भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि चाहे कोई मुस्लिम हो, दलित हो, आदिवासी हो, गरीब हो या कमजोर वर्ग से संबंधित हो, अगर वह अपने अधिकारों और सम्मान के लिए मजबूत आवाज चाहता है तो उसे लोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी।

ओवैसी ने कहा कि केवल संख्या में अधिक होना पर्याप्त नहीं है। राजनीतिक प्रतिनिधियों को जनता के मुद्दों पर आवाज उठानी होगी और गरीब तथा कमजोर लोगों के हितों के लिए काम करना होगा।

तेलंगाना में AIMIM के काम का किया जिक्र

AIMIM प्रमुख ने तेलंगाना में अपनी पार्टी के विधायकों के काम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में उनकी पार्टी के सात विधायक हैं और पार्टी ने मुस्लिम समुदाय के बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया है।

उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना में छठी से बारहवीं कक्षा तक हजारों मुस्लिम छात्र-छात्राएं बेहतर सुविधाओं के साथ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग स्कूल और हॉस्टल जैसी सुविधाओं का भी जिक्र किया।

ओवैसी ने कहा कि राजनीति केवल अपनी सुरक्षा या पुलिस की लाठियों से बचने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि गरीब और कमजोर लोगों के इलाकों के विकास, बच्चों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए भी राजनीति क्यों नहीं हो सकती?

हमें सत्ता नहीं, इंसाफ चाहिए

ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना या मंत्री बनना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना में उनकी पार्टी को सत्ता में शामिल होने के प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने सत्ता में भागीदारी के बजाय अपने राजनीतिक सिद्धांतों को प्राथमिकता दी।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा इंसाफ है। उन्होंने कहा, “हमें सत्ता से मतलब नहीं है, हमें मंत्री बनने से मतलब नहीं है। हमें इंसाफ चाहिए।”

ओवैसी ने कहा कि उनके बुजुर्गों की भी यही इच्छा थी कि देश में इंसाफ कायम हो और कमजोर लोगों को उनके अधिकार मिलें।

बिलकिस बानो मामले का भी किया जिक्र

AIMIM प्रमुख ने अपने भाषण में बिलकिस बानो मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिलकिस बानो को इंसाफ मिलना केवल किसी एक समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की महिलाओं और न्याय व्यवस्था से जुड़ा सवाल है।

उन्होंने कहा कि जब ऐसे मामलों पर राजनीतिक दलों और नेताओं की चुप्पी दिखाई देती है तो सवाल उठता है कि आखिर कमजोर लोगों की आवाज कौन उठाएगा।

ओवैसी ने कहा कि जब उनकी पार्टी संसद में ट्रिपल तलाक और अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखती है तो वह अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी निभाती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने जिन मुद्दों को सही समझा, उन पर खुलकर अपनी बात रखी।

चुप रहने वालों को जनता जवाब दे

ओवैसी ने कहा कि जो लोग जनता के मुद्दों पर चुप रहते हैं, उन्हें भी जनता को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय मतदाताओं को यह तय करना होता है कि कौन उनके अधिकारों, समस्याओं और भविष्य के लिए आवाज उठाएगा।

उन्होंने लोगों से अपने वोट की ताकत को समझने की अपील करते हुए कहा कि किस पार्टी को वोट देना है, यह हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। उनका काम जनता के सामने अपनी बात रखना और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।

ओवैसी ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक आवाज का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से एकजुट होने और अपने राजनीतिक अधिकारों को समझने की अपील की।

हम किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं

AIMIM प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी किसी धर्म के खिलाफ नहीं है और न ही किसी धर्म के खिलाफ जाने की उसकी विचारधारा है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भारत में कमजोरों और पीड़ितों को न्याय दिलाना है।

उन्होंने कहा कि भारत में दलित, आदिवासी, गरीब, कमजोर और अल्पसंख्यक समुदायों को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश तभी मजबूत होगा जब समाज के हर कमजोर व्यक्ति को न्याय, सम्मान और बराबरी मिलेगी।

अंत में ओवैसी ने कहा कि लोगों को अपने वोट की ताकत को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी पार्टी को समर्थन देना या न देना जनता का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनका काम जनता के बीच जाकर अपने विचार रखना और लोगों से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील करना है।

उन्होंने कहा कि उनके शब्दों में कितनी ताकत है, यह वह नहीं जानते, लेकिन उनका विश्वास है कि लोगों के दिलों को बदलने वाला अल्लाह है और वही लोगों को सही रास्ते की ओर ले जाएगा। यह भी पढ़ें

Arzehind.com

हिन्द न्यूज़ डेस्क

हिन्द न्यूज़ डेस्क एक स्वतंत्र हिंदी समाचार मंच है, जहाँ राजनीति, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, शिक्षा, खेल, धर्म और समाज से जुड़ी विश्वसनीय एवं तथ्यात्मक खबरें प्रकाशित की जाती हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना है।

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

टेलीग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

Leave a Comment